
मोहला। जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक नन्हे बच्चे की सांसें दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही थीं। खेलने-कूदने की उम्र में थक जाना, बार-बार सीने में दर्द की शिकायत और माता-पिता की आंखों में बढ़ती चिंता यह उस परिवार की रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी थी। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे महंगे इलाज का खर्च उठा सकें। धीरे-धीरे उम्मीदें टूटने लगी थीं।
इसी दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम द्वारा स्कूल एवं आंगनबाड़ी में की जा रही नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्चे की पहचान की गई। जांच में पता चला कि बच्चा गंभीर हृदय रोग से पीड़ित है। यह जानकारी परिवार के लिए भयावह जरूर थी, लेकिन साथ ही एक नई उम्मीद भी लेकर आई चिरायु योजना।
कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय खोब्रागड़े के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता से कार्रवाई की। बिना किसी विलंब के बच्चे को शासकीय वाहन से रायपुर भेजा गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उसका सफल ऑपरेशन किया गया। आज वही बच्चा मुस्कुराते हुए स्कूल जाता है, खेलता है और सपने देखता है—एक सामान्य और स्वस्थ बचपन जी रहा है।
ऐसी कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि जिले के 11 बच्चों की है, जिनके दिलों को चिरायु योजना ने नई धड़कन दी है। यही नहीं, योजना के माध्यम से जिले में अब तक त्वचा रोग से पीड़ित 74, दृष्टि दोष से ग्रसित 97, दंत रोग से 27, कान संक्रमण से 35, एनीमिया से 22, कुपोषण से 64 तथा अन्य बीमारियों से ग्रसित 43 बच्चों का निःशुल्क एवं सफल उपचार किया जा चुका है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम द्वारा स्कूलों एवं आंगनबाड़ियों में लगातार की जा रही स्वास्थ्य जांच ने सैकड़ों परिवारों की चिंता को राहत में बदल दिया है। जिन माता-पिता की आंखों में कभी डर और असहायता थी, आज वहीं आंखें कृतज्ञता और सुकून से भरी हैं। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर चिरायु योजना का सहारा नहीं मिला होता, तो उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता था।
