
जिला अस्पताल एक्स-रे सेवा ठप, मंडी में धान भीगा,वार्डो के घरों में भी जलभराव, कॉलोनाइजर्स की मनमानी,कांग्रेस ने ट्रिपल इंजन सरकार और निगम की तैयारियों पर उठाए सवाल
राजनांदगांव मानसून की पहली तेज बारिश ने विकास और मानसून पूर्व तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी। जिला अस्पताल में जलभराव से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, कृषि उपज मंडी में लाखों रुपये का धान भीग गया और शहर के कई वार्ड पानी में डूब गए।
कांग्रेस के पूर्व पार्षद एवं दल प्रवक्ता ऋषि शास्त्री ने इसे भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार की विफलता बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई की मांग की।
मानसून की पहली तेज बारिश ने राजनांदगांव शहर में विकास के दावों और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। जिला अस्पताल से लेकर कृषि उपज मंडी और शहर के कई रिहायशी इलाकों तक जलभराव की स्थिति बनने से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस के पूर्व पार्षद एवं दल प्रवक्ता ऋषि शास्त्री ने कहा कि पहली ही बारिश में शहर की बदहाल व्यवस्था सामने आ गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मानसून पूर्व तैयारियां केवल कागजों तक सीमित रहीं। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल परिसर में पानी भर जाने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अस्पताल के कई हिस्सों में जलभराव होने से आवाजाही प्रभावित रही जबकि एक्स-रे सेवा अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। मजबूरी में मरीजों को निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
शास्त्री ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पताल में यदि प्रभावी जल निकासी व्यवस्था नहीं है, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने बताया कि कृषि उपज मंडी में नीलामी के लिए रखा किसानों और व्यापारियों का धान बारिश के पानी में भीग गया जिससे लाखों रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
उनका कहना है कि यदि समय रहते मंडी परिसर में जल निकासी और सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए गए होते, तो किसानों और व्यापारियों को इस नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता। श्री शास्त्री ने कहा कि बसंतपुर, इंद्रानगर, नंदई सहित शहर के अनेक रिहायशी क्षेत्रों और श्रमिक बस्तियों में बारिश का पानी घरों तक पहुंच गया।
कई परिवारों का घरेलू सामान खराब हो गया और लोगों का आवागमन घंटों तक बाधित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि हर वर्ष नालों और नालियों की सफाई तथा जल निकासी व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में शहर का जलमग्न हो जाना नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
उन्होंने कहा कि शहर में जलभराव का एक बड़ा कारण कॉलोनाइजरों की मनमानी भी है। प्लॉट बेचने के उद्देश्य से कई स्थानों पर प्राकृतिक नालों और जल निकासी मार्गों को बंद कर दिया गया या उनकी दिशा बदल दी गई। बिना समुचित ड्रेनेज और सीवरेज व्यवस्था के कॉलोनियां विकसित किए जाने का खामियाजा अब पूरे शहर को भुगतना पड़ रहा है।
नई कॉलोनियों के साथ-साथ पुराने रिहायशी क्षेत्रों में भी जलभराव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने ने भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावों की सच्चाई पहली ही बारिश में सामने आ गई है। उन्होंने मांग की कि जलभराव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और नियमों की अनदेखी करने वाले कॉलोनाइजरों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाए।
साथ ही भविष्य में प्राकृतिक जल निकासी तंत्र से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर रोक लगाने तथा शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को वैज्ञानिक ढंग से विकसित करने की दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।
