
छुईखदान/खैरागढ़। केसीजी जिले की छुईखदान पुलिस ने साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में ऑनलाइन सट्टे के मास्टरमाइंड सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 19 एटीएम कार्ड, 5 बैंक पासबुक, 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप समेत करीब 5.50 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया है। वहीं विभिन्न बैंक खातों में उपलब्ध 5 लाख रुपये की राशि फ्रीज कराई गई है। इस प्रकार कुल 10.50 लाख रुपये की संपत्ति जब्त एवं फ्रीज की गई है।
पुलिस के अनुसार भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल एवं एनसीआरबी से प्राप्त सूचना के आधार पर छुईखदान थाना पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों की जांच शुरू की। जांच में ग्राम नवागांव (लोधी) निवासी दीपक निर्मलकर के बैंक खाते में लगभग 1.69 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ, जो ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर ठगी से जुड़ा पाया गया।
पूछताछ में दीपक निर्मलकर ने स्वीकार किया कि उसने अपना बैंक खाता 12 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर राहुल जंघेल को दिया था। इसके बाद पुलिस जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र के मुंबई स्थित पलावा सिटी के एक किराये के फ्लैट से ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर फ्रॉड का संचालन किया जा रहा था। ठगी से प्राप्त रकम विभिन्न म्यूल बैंक खातों में जमा कराई जाती थी।
जांच के दौरान राहुल जंघेल ने बताया कि पूरे नेटवर्क का संचालन राहुल देवांगन करता था, जो नेटवर्क से जुड़े लोगों को करीब 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देता था। पूछताछ में राहुल देवांगन ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन स्वीकार किया। उसने बताया कि लगातार आर्थिक नुकसान के कारण करीब चार माह पहले मुंबई से संचालन बंद कर सभी सदस्य अपने गृह जिलों में लौट आए थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वर्तमान में विजय कुमार साहू अपने गृह क्षेत्र से ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क संचालित कर रहा था। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले लगभग दो वर्षों से फेयर प्ले, रेड्डी अन्ना, जयराम और शिवा बुक जैसे ऑनलाइन गेमिंग एवं सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में अवैध नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
मामले में पुलिस ने दीपक निर्मलकर (20), राहुल जंघेल (23), राहुल देवांगन (25) तथा विजय कुमार साहू (22) को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2), 317(4), 318(4), 61(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस मामले में अन्य संदिग्ध बैंक खातों एवं नेटवर्क से जुड़े लोगों की भी जांच कर रही है।
