
कृषि विज्ञान केंद्र की पहल से 500 से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपनाकर हो रहे लाभान्वित
रायपुर, 29 जुलाई 2026प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती, कम पानी का उपयोग और जैविक खाद का प्रयोग मुख्य तरीके हैं। ये उपाय मिट्टी की सेहत सुधारते हैं और खेती का खर्च कम करते हैं।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बीजापुर की पहल से जिले में प्राकृतिक खेती को नया प्रोत्साहन मिल रहा है। किसानों को जैविक खाद और प्राकृतिक कृषि आदान स्वयं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे खेती की लागत कम करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं।
मार्च 2026 से जुलाई 2026 के बीच बीजापुर जिला के बीजापुर विकासखंड के विभिन्न गांवों में प्राकृतिक खेती पर चार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन प्रशिक्षणों का सकारात्मक असर अब जिले के कई गांवों में दिखाई देने लगा है।
गोबर, जीवामृत और गोमूत्र के उपयोग से मिट्टी उपजाऊ बनती है। ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक नमी बनाए रखने की विधि से पानी की बचत होती है।
किसानों ने सीखी प्राकृतिक खेती की तकनीक
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीटनाशक, मल्चिंग और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के बाद ग्राम मुसालूर, इटपाल, नुकनपाल, मांझीगुड़ा, तुमनार सहित आसपास के गांवों के किसानों ने अपने स्तर पर जैविक खाद और प्राकृतिक कृषि आदान तैयार करना शुरू कर दिया।
कम लागत में तैयार कर रहे जैविक खाद
किसान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गोबर, गौमूत्र, गुड़, बेसन और अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग करके कम लागत में जीवामृत और घनजीवामृत तैयार कर रहे हैं। इनका नियमित उपयोग फसलों में करने से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम हुआ है।
इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता में सुधार, फसलों की बेहतर वृद्धि और पर्यावरण-अनुकूल खेती के प्रति किसानों का विश्वास भी बढ़ा है।
500 से अधिक किसान हो रहे लाभान्वित
प्रशिक्षण प्राप्त किसानों ने अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किए, जिससे प्राकृतिक खेती का विस्तार तेजी से आसपास के गांवों तक हुआ।
वर्तमान में इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव से 500 से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर लाभान्वित हो रहे हैं।
किसान अब स्वयं जैविक खाद तैयार कर खेती की लागत घटा रहे हैं और टिकाऊ तथा सुरक्षित कृषि प्रणाली की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र दे रहा लगातार तकनीकी सहयोग
कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर किसानों को समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, खेत भ्रमण और अनुवर्ती सहायता भी उपलब्ध करा रहा है।
इससे जिले में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। यह पहल बीजापुर में प्राकृतिक खेती, टिकाऊ कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रही है।
